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बॉलीवुड एक्ट्रेस रानी मुखर्जी (Rani Mukerji) ने हिंदी सिनेमा में 30 साल पूरे कर लिए हैं. वह उन चुनिंदा अभिनेत्रियों में शामिल हैं, जिन्होंने हर दौर में मजबूत, आत्मनिर्भर और सोचने-समझने वाली महिलाओं को पर्दे पर जगह दी. अपने करियर की शुरुआत से ही रानी ने रूढ़ियों को चुनौती दी और ऐसे किरदार चुने, जिन्होंने महिलाओं की गरिमा, समानता और आत्मसम्मान को आवाज़ दी. अपने अभिनय से उन्होंने आधुनिक भारतीय महिला की छवि को नए मायने दिए. रानी मुखर्जी का सिनेमा सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि एक सोच है—जो समाज को आईना दिखाती है.
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बनाई खुद की पहचान
रानी मुखर्जी एक ऐसे परिवार से आती हैं, जिसकी जड़ें फिल्म जगत में गहराई तक फैली हैं. उनके पिता राम मुखर्जी (Ram Mukherjee) ने फिल्मलय स्टूडियो (Filmalaya Studios) की सह-स्थापना की थी, जबकि उनकी मां एक गायिका थीं. वह फिल्म निर्माता अयान मुखर्जी (Ayan Mukerji) और एक्ट्रेस काजोल की चचेरी बहन भी हैं. हालांकि, इस फिल्मी पृष्ठभूमि के बावजूद रानी ने कभी विरासत के सहारे आगे बढ़ने की कोशिश नहीं की. उन्होंने अपनी मेहनत, प्रतिभा और लगन के दम पर अपनी अलग पहचान बनाई और वैश्विक स्तर पर नाम कमाया.
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बंगाली सिनेमा से हिंदी फिल्मों तक
रानी ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत अपने पिता की बंगाली फिल्म ‘बियर फूल’ (Biyer Phool, 1996) से की, जिसमें वह प्रोसेनजीत चटर्जी (Prosenjit Chatterjee) के साथ नजर आईं. इसके बाद 1996 में ही उनकी हिंदी फिल्म ‘राजा की आएगी बारात’ (Raja Ki Aayegi Baraat) रिलीज़ हुई. इस फिल्म में माला (Mala) के किरदार में रानी ने ऐसा दमदार अभिनय किया कि इंडस्ट्री का ध्यान तुरंत उनकी ओर गया. इस प्रदर्शन के बाद उन्होंने एक साथ तीन हिंदी फिल्में साइन कीं.
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‘मेहंदी’ से ‘खंडाला गर्ल’ तक
फिल्म ‘मेहंदी’ (Mehndi, 1998) में एक सशक्त महिला का किरदार निभाकर रानी ने अपनी अलग पहचान बनाई. उसी साल आमिर खान (Aamir Khan) के साथ ‘गुलाम’ (Ghulam) में गाया गया गाना “आती क्या खंडाला” ने उन्हें रातों-रात “खंडाला गर्ल” बना दिया. इसके बाद करण जौहर (Karan Johar) की ‘कुछ कुछ होता है’ (Kuch Kuch Hota Hai, 1998) में टीना (Tina) के किरदार के लिए रानी को सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला.
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2002–2005: स्वर्णिम दौर
2002 में शाद अली (Shaad Ali) की फिल्म ‘साथिया’ (Saathiya) से रानी ने अपने करियर में नया अध्याय जोड़ा. इसके बाद ‘चलते चलते’ (Chalte Chalte), ‘युवा’ (Yuva), ‘हम तुम’ (Hum Tum) और ‘वीर-ज़ारा’ (Veer-Zaara) जैसी फिल्मों ने उन्हें इंडस्ट्री की सबसे भरोसेमंद अभिनेत्री बना दिया. 2004 में उन्होंने एक ही साल में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री और सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री—दोनों श्रेणियों में बड़े अवॉर्ड जीते, जो आज भी एक दुर्लभ उपलब्धि है.
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रानी मुखर्जी ने अपने शानदार करियर में कई बेहतरीन फ़िल्में की हैं जिनमें शामिल हैं-
कुछ कुछ होता है- फिल्म कुछ कुछ होता है 1998 में आई रोमांटिक कॉमेडी-ड्रामा फिल्म थी, जिसे करन जौहर ने डायरेक्ट किया था. रानी मुखर्जी, शाहरुख खान, काजोल, सलमान खान और सना सईद की इस फिल्म का बजट 10 करोड़ था और इसने 106.73 करोड़ कमाए थे. ये रानी के करियर की पहली हिट फिल्म थी.
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हम तुम- फिल्म 'हम तुम' (2004) में रानी ने रिया प्रकाश का किरदार निभाया है, जो एक आज़ाद ख्यालों की बेफिक्र महिला है. इस रोमांटिक कॉमेडी में, करण (सैफ अली खान) के साथ उनका रिश्ता कई सालों की आकस्मिक मुलाकातों के बाद पनपता है. सशक्त महिला चरित्र चित्रण, हास्य और आकर्षण से भरपूर इस फिल्म ने आधुनिक रोमांस को एक नई परिभाषा दी.
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वीर जारा- रानी मुखर्जी की फिल्म वीर जारा 2004 में रिलीज हुई थी. ये एक रोमांटिक फिल्म थी, जिसका डायरेक्शन यश चोपड़ा ने किया था. इसमें शाहरुख खान,प्रीति जिंटा, अमिताभ बच्चन, हेमा मालिनी, दिव्या दत्ता, मनोज बाजपेयी, बोमन ईरानी, अनुपम खेर और किरण खेर लीड रोल में थे. फिल्म का बजट 23 करोड़ था और इसने 107 करोड़ का कारोबार किया था.
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ब्लैक - ‘ब्लैक’ (2005) फिल्म मिशेल मैकनैली (रानी मुखर्जी) की कहानी है, जो एक बधिर-दृष्टिहीन महिला हैं. उनके शिक्षक (अमिताभ बच्चन) के साथ सीखने और जीवन में आगे बढ़ने का उनका सफर दिल दहला देने वाला और प्रेरणादायक दोनों है. रानी का सशक्त और वास्तविक अभिनय मानवीय दृढ़ संकल्प और हिम्मत को उजागर करता है, साथ ही विकलांगता की चुनौतियों को भी बखूबी दर्शाता है.
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कभी अलविदा ना कहना- रानी मुखर्जी की फिल्म कभी अलविदा ना कहना 2006 में रिलीज हुई थी. ये एक रोमांटिक ड्रामा फिल्म थी, जिसका निर्देशन करन जौहर ने किया था. इसमें अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान, अभिषेक बच्चन, रानी मुखर्जी, प्रीति जिंटा और किरण खेर लीड रोल में थे. 50 करोड़ के बजट वाली इस फिल्म ने 113 करोड़ का कलेक्शन किया था.
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नो वन किल्ड जेसिका- साल 2011 में रिलीज हुई फिल्म नो वन किल्ड जसिका में रानी मुखर्जी ने एक बार मीरा गायती के किरदार में दमदार अभिनय किया है, जो न्याय के लिए संघर्ष करने वाली एक निडर और दृढ़ निश्चयी पत्रकार हैं. राजकुमार गुप्ता द्वारा लिखित और निर्देशित यह क्राइम ड्रामा कुख्यात जेसिका लाल हत्याकांड पर आधारित है. ये फिल्म रानी के करियर की सबसे बेहतरीन फिल्मों में से एक है.
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तलाश- 2012 में आई रानी मुखर्जी की फिल्म तलाश एक क्राइम थ्रिलर फिल्म थी, जिसे रीमा कागती ने लिखा और निर्देशित किया था. एक्सेल एंटरटेनमेंट के बैनर तले बनी फिल्म में आमिर खान, करीना कपूर, नवाजुद्दीन सिद्दीकी, राजकुमार राव लीड रोल में थे. 71 करोड़ के बजट वाली इस मूवी ने 180.83 करोड़ का बिजनेस किया था.
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हिचकी- रानी मुखर्जी के करियर की सबसे कमाऊ फिल्म हिचकी है. 2018 में आई ये एक हिंदी कॉमेडी ड्रामा फिल्म थी, जिसके डायरेक्टर सिद्धार्थ पी मल्होत्रा थे. फिल्म को 20 करोड़ के बजट में बनाया गया था और इसने बॉक्स ऑफिस पर 209.72 करोड़ का कलेक्शन किया था.
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उनकी अन्य फ़िल्में हैं -गुलाम (1998), मेहंदी (1998), हैलो ब्रदर (1999), बादल (2000), हद कर दी आपने (2000), बिच्छू (2000), हर दिल जो प्यार करेगा (2000), कहीं प्यार ना हो जाए (2000), चोरी चोरी चुपके चुपके (2001), बस इतना सा ख्वाब है (2001), नायक: द रियल हीरो (2001), कभी खुशी कभी गम (2001) , प्यार दीवाना होता है (2002), मुझसे दोस्ती करोगे (2002) , चलो इश्क लड़ाये (2002), चलते चलते (2003), कलकत्ता मेल (2003), LOC कारगिल (2003), हम तुम (2004) , बंटी और बबली (2005) , पहेली (2005), मंगल पांडे: द राइजिंग (2005) , बाबुल (2006), ता रा रम पम (2007) , लागा चुनरी में दाग - जर्नी ऑफ ए वूमन (2007) , सांवरिया (2007), थोड़ा प्यार थोड़ा मैजिक (2008) , लक बाय चांस (2009), दिल बोले हड़िप्पा (2009) , अय्या (2012), तलाश: द आंसर लाइज़ विदइन (2012), बॉम्बे टॉकीज (2013), मर्दानी (2014) , हिचकी (2018) , मर्दानी 2 (2019) , बंटी और बबली 2 (2021) और मिसेज चटर्जी बनाम नॉर्वे (2023).
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‘मर्दानी’ फ्रैंचाइज़ी: रानी के करियर की पहचान
रानी मुखर्जी के करियर की सबसे दमदार मिसाल ‘मर्दानी’ (Mardaani) फ्रैंचाइज़ी है. यह भारत की इकलौती महिला-प्रधान थिएट्रिकल फ्रैंचाइज़ी है, जो एक महिला पुलिस अधिकारी की कहानी पर आधारित है और लगातार बॉक्स ऑफिस पर सफल रही है. ‘मर्दानी’ (2014) और ‘मर्दानी 2’ (2019) में रानी ने पुलिस ऑफिसर शिवानी शिवाजी रॉय (Shivani Shivaji Roy) का किरदार निभाया—एक ऐसी महिला जो अपराध, पितृसत्ता और हिंसा के खिलाफ अकेले खड़ी होती है. अब ‘मर्दानी 3’ (Mardaani 3) के साथ यह फ्रैंचाइज़ी न सिर्फ आगे बढ़ रही है.
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सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का मिला पुरस्कार
अपने करियर के तीन दशकों में, रानी ने 2025 में 71वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार जीतकर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की. फिल्म 'मिसेज चटर्जी वर्सेस नॉर्वे' में उनके दमदार अभिनय ने उन्हें लंबे समय से प्रतीक्षित राष्ट्रीय पहचान दिलाई, जिससे सार्थक और प्रभावशाली कहानी कहने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता की पुष्टि हुई.
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सपनों ने बदली राह
अभिनय की दुनिया में कदम रखने से पहले रानी मुखर्जी की महत्वाकांक्षाएं बिल्कुल अलग थीं. गृह विज्ञान की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह ज्वैलरी डिज़ाइनर या इंटीरियर डिज़ाइनर बनना चाहती थीं. लेकिन तीन लाख रुपये की भारी फीस उनके रास्ते में बाधा बन गई. यही आर्थिक मजबूरी उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट बनी और किस्मत उन्हें फिल्मों की ओर ले आई—जहाँ उन्होंने अपनी असली पहचान पाई.
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निजी जीवन - यश चोपड़ा की बहू
अपने करियर में लगातार शानदार प्रदर्शन कर रहीं रानी मुखर्जी ने 21 अप्रैल 2014 को प्रसिद्ध निर्माता-निर्देशक आदित्य चोपड़ा से गुपचुप तरीके से इटली में शादी की. यह शादी बेहद निजी रही और इसकी भनक मीडिया को भी नहीं लगी. आज रानी एक प्यारी-सी बेटी अदिरा (Adira) की मां हैं. गौरतलब है कि आदित्य चोपड़ा देश के सबसे बड़े प्रोडक्शन हाउस यशराज फिल्म्स के मालिक हैं और दिवंगत फिल्ममेकर यश चोपड़ा (Yash Chopra) के पुत्र हैं, जिन्होंने भारतीय हिंदी सिनेमा को कई कालजयी फिल्में दीं. इस रिश्ते के ज़रिए रानी मुखर्जी यश चोपड़ा परिवार की बहू हैं, लेकिन निजी जीवन में सादगी और गरिमा को प्राथमिकता देते हुए उन्होंने हमेशा अपने काम को ही अपनी पहचान बनाए रखा.
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अपकमिंग फिल्म
जल्द ही वे हिट फिल्म 'मर्दानी 3' में नज़र आएंगी, जिसमें वह शिवानी शिवाजी रॉय की भूमिका में फिर से दिखाई देंगी. यह फिल्म 30 जनवरी, 2026 को रिलीज होने वाली है.
30 साल बाद भी रानी मुखर्जी हिंदी सिनेमा की उन चुनिंदा अभिनेत्रियों में हैं, जिनकी जगह कोई नहीं ले सकता. उनके 30 साल का सफ़र दमदार अभिनय, सशक्त महिला किरदारों और लगातार बदलते सिनेमा में खुद को साबित करने की कहानी है. आज भी वे यह साबित करती हैं कि असली प्रतिभा वक्त से आगे होती है.
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30 Years of Rani Mukerji | Bollywood Actress | Women Centric Cinema | Strong Female Characters | Indian Cinema Icon not present in content
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