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1971 में आई फ़िल्म 'शर्मीली' अपने दौर की उन फिल्मों में से है, जो वैसे तो एक रोमांटिक कहानी के रूप में प्रचारित हुई थी लेकिन फ़िल्म देखने पर उसमें सस्पेंस, थ्रिल के साथ अजब भावनाओं की कई परतें छुपी हुई हैं। यह फ़िल्म प्यार की कहानी तो है, लेकिन पहचान के भटकाव, भरोसे और कर्तव्य के टकराव की भी दास्तान है। उस दौर में जब ज़्यादातर फिल्में सीधे-सादे रोमांस पर टिकी होती थीं, शर्मीली ने दर्शकों को थोड़ा चौंकाया भी और मजा भी दिया ।
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फ़िल्म का निर्माण सुबोध मुखर्जी ने किया था और निर्देशन की कमान समीर गाँगुली के हाथ में थी। कहानी मशहूर लेखक गुलशन नंदा की थी, जिनकी कहानियों में रोमांस के साथ-साथ रहस्य भी हमेशा मौजूद रहता था। गुलशन नंदा की लेखनी को सिनेमा में ढालना आसान नहीं होता था, लेकिन समीर गाँगुली ने इसे बहुत संतुलन के साथ पर्दे पर उतारा। (Sharmilee 1971 movie romantic thriller)
कहानी शुरू होती है कैप्टन अजीत कपूर से, जो आर्मी बेस में है और छुट्टी पर लौटते हुए रास्ते में एक रिसॉर्ट में ठहरता है जहां एक पार्टी चल रही होती है। वहीं, उसी पार्टी में उसकी मुलाकात एक चुलबुली और आत्मविश्वासी लड़की से होती है। दोनों के बीच एक अजीब सा आकर्षण पैदा होता है। बाद में जब अजीत अपने घर लौटता है तो उसकी शादी की बात चलती है और इस सिलसिले में वह कंचन नाम की लड़की से मिलने जाता है। कंचन को देखकर उसे लगता है कि यह वही लड़की है जिससे वह पार्टी में मिला था। वो तुरंत शादी के लिए हां कह देता है। शादी हो जाती है। लेकिन सच धीरे-धीरे सामने आता है कि कंचन वो लड़की नहीं जिसे वो रिसॉर्ट में मिला था। इस धोखे के कारण नाराज होकर अजीत, कंचन से दूर दूर रहता है। दरअसल कंचन और कामिनी जुड़वां बहनें हैं। एक शर्मीली और शांत, दूसरी बेबाक और निडर। यहीं से कहानी रोमांस से आगे बढ़कर सस्पेंस का रूप ले लेती है। अजीत कामिनी को ढूंढता है और वो उसे मिल जाती है। कामिनी अजीत पर अपने इमोशन का जादू चला कर उसे भ्रमित करती रहती है। तभी अजीत के आर्मी कर्नल अजीत को एक दुश्मन स्पाई की तस्वीर दिखा कर उसे पकड़ने की जिम्मेदारी दे देता है। अजीत ये देख कर दंग रह जाता है कि वो कामिनी की तस्वीर है। बस कहानी यहां से एक नई दिशा ले लेती है और आखिर दोनों बहने एक दूसरे के लिए बलिदान देने में पीछे नहीं हटती। (Sharmilee movie story Gulshan Nanda)
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शशि कपूर ने कैप्टन अजीत कपूर का किरदार बहुत सहजता से निभाया। राखी के लिए यह फ़िल्म उनके करियर के लिए एक मील का पत्थर माना जाता है क्योंकि उन्होंने दोहरा किरदार निभाया और दोनों बहनों के स्वभाव को अलग-अलग ढंग से पेश किया। एक तरफ कंचन की चुप्पी और त्याग, दूसरी तरफ कामिनी की बेफिक्री और आत्मविश्वास। दोनों किरदारों में फर्क साफ दिखता है, बिना किसी बनावट के। नासिर हुसैन ने फादर जोसेफ के रोल में कहानी को भावनात्मक सहारा दिया। (Sharmilee movie producer Subodh Mukherjee)
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फ़िल्म 'शर्मीली' की जान उसका संगीत है। संगीतकार सचिन देव बर्मन ने इस फ़िल्म के लिए ऐसे गीत रचे, जो आज भी लोगों की ज़ुबान पर हैं। नीरज के लिखे गीत सीधे दिल से निकलते हैं और दिल तक पहुंचते हैं। रेशमी उजाला है मखमली अंधेरा, खिलते हैं गुल यहाँ, मेघा छाये आधी रात और आज मदहोश हुआ जाये रे जैसे गाने उस जमाने में हर युवक युवती के जुबान पर थी। कहा जाता है कि एस डी बर्मन इन गानों की धुनों पर बहुत बारीकी से काम करते थे और रिकॉर्डिंग के वक्त माहौल बिल्कुल शांत रखा जाता था।
फ़िल्म से जुड़ी एक दिलचस्प बात यह है कि राखी के डबल रोल को दिखाने के लिए उस समय तकनीक बहुत सीमित थी। कई सीन बार-बार शूट किए गए, ताकि दोनों बहनों का फर्क साफ नजर आए। लेकिन शशि कपूर और राखी के बीच की प्रेम दृश्यों की केमिस्ट्री इतनी स्वाभाविक थी कि कई सीन पहली ही टेक में ओके हो गए। यह भी कहा जाता है कि गुलशन नंदा खुद शूटिंग के दौरान सेट पर आते थे और कहानी की बारीकियों पर चर्चा करते थे।
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शर्मीली बॉक्स ऑफिस पर भी काफी कामयाब रही और दर्शकों ने इसे खूब प्यार दिया। यह फ़िल्म आज भी इसलिए याद की जाती है, क्योंकि इसमें रोमांस, रहस्य और संगीत का ऐसा मेल है, जो बहुत कम फिल्मों में देखने को मिलता है। 'शर्मीली' वक्त के साथ पुरानी जरूर हो गई है, लेकिन उसकी खुशबू आज भी उतनी ही ताज़ा है। (Sharmilee movie love story with mystery)
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'शर्मीली' फ़िल्म की बॉक्स ऑफिस कलेक्शन
₹2.6 करोड़ थी (2025 में ₹124 करोड़ से ज्यादा या US$15 मिलियन से ज्यादा के बराबर)
'शर्मिली' फ़िल्म का साउंडट्रैक भारतीय दर्शकों के बीच फ़िल्म के रिलीज़ होते ही तुरंत हिट हो गया, ये गाने 1971 के बिनाका गीतमाला के टॉप 10 गानों में शामिल थे। "खिलते हैं गुल यहां" गाना, जिसे फिल्म में किशोर कुमार और लता मंगेशकर ने अलग-अलग सोलो के रूप में गाया है, राग भीमपलासी (इस राग को कर्नाटक संगीत में अभेरी के नाम से भी जाना जाता है) में निर्मित किया गया है, जबकि "मेघा छाए आधी रात" राग पटदीप (कर्नाटक संगीत के गौरीमनोहरी के करीब) में रचा गया है।
खबरों के मुताबिक पहले इस फ़िल्म की नायिका के रूप में सायरा बानो ने फिल्म साइन की थी लेकिन बीमार पड़ने के बाद उन्हें हटना पड़ा था ।
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बताया जाता है कि दिल्ली में फिल्म के ग्रैंड प्रीमियर के दौरान रंजीत ने अपने परिवार के कई सदस्यों को आमंत्रित किया था । इंटरवल के दौरान जब कास्ट को स्टेज पर बुलाया गया तो रंजीत ने देखा कि उनके परिवार के सभी सदस्य चले गए हैं। ये देखकर वे हैरान रह गए। प्रीमियर के बाद जब वे घर पहुंचे तो देखा कि सभी उसपर नाराज हैं। कारण पूछने पर उन्हे डांट पड़ने लगी। रंजीत की मां ने गुस्से में उससे पूछा कि तुम घर में कैसे घुसे? निकल जाओ। राखी इतनी प्यारी लड़की है और तुमने फिल्म में उसके साथ इतना गलत काम किया है? "
यह सुन कर रंजीत खूब हँसे और मां को समझाया कि यह सब हकीकत नहीं सिर्फ एक्टिंग है। (Sharmilee movie narrative by Gulshan Nanda)
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बताया जाता है कि सायरा बानो और राखी को इस फिल्म का ऑफर होने से पहले, लीना चंदावरकर को फिल्म ऑफर की गई थी लेकिन डेट की समस्याओं के कारण उन्होंने मना कर दिया। बाद में उन्हें इसका पछतावा भी हुआ क्योंकि उन्हें कभी शशि कपूर के साथ काम करने का मौका नहीं मिला।
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