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शोले के सेट से जुड़ी कई दिलचस्प और लगभग अविश्वसनीय यादें हाल ही में फिर से ताज़ा हो गई। दिग्गज फिल्मकार रमेश सिप्पी और अभिनेत्री हेमा मालिनी ने धर्मेंद्र के जज़्बे, मस्ती और अनुशासन से जुड़े किस्सों को साझा करते हुए कई घटनायें बताई ।
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हेमा मालिनी और रमेश सिप्पी ने एक मैगज़ीन कवर लॉन्च के दौरान बताया कि धर्मेंद्र सिर्फ पर्दे पर ही वीरू नहीं थे, असल ज़िंदगी में भी उनके अंदर वही जुनून और वही ऊर्जा थी। रमेश सिप्पी ने आईएएनएस से बातचीत में बताया कि एक दिन अचानक धर्मेंद्र ने मूड में आकर यह तय कर लिया कि वह होटल से शूटिंग लोकेशन तक पैदल ही जाएंगे। जिस होटल में शोले की कास्ट एंड क्रू ठहरे हुए थे वहां से शूटिंग स्थल की दूरी करीब पचास किलोमीटर थी। लेकिन धरम साहब ने जिद पकड़ ली कि वे पैदल ही जायेंगे शूटिंग पर। रात दो या तीन बजे ही वे होटल से निकल पड़े। बीच में कहीं पांच दस मिनट के लिए रुके और सुबह करीब सात बजे शूटिंग स्थल पहुंच गए। एक घंटा आराम करने के बाद वे पूरी तरह शूट के लिए तैयार थे। सिप्पी जी के मुताबिक, यह देखकर सब हैरान रह गए थे, लेकिन धर्मेंद्र की दृढ़ता अडिग थी। (Sholay movie set memories)
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हेमा मालिनी ने भी उस दौर को याद करते हुए कहा कि हाँ, धर्मेंद्र मीलों मील पैदल चल लिया करते थे। उनके भीतर गज़ब की सहनशक्ति और इच्छाशक्ति थी, जो आज के दौर में दुर्लभ लगती है।
रमेश सिप्पी ने धर्मेंद्र के एक और शरारती रंग का ज़िक्र किया। उन्होंने बताया कि धर्मेंद्र जी बेहद हँसमुख और मस्ती पसंद इंसान थे। मस्ती के मूड में, शरारत के लिए वे कभी-कभी नारियल पानी में थोड़ा सा वोडका मिला लेते और देखने वालों की तरफ एक शरारती सी मुस्कान के साथ आंख मार देते। यह भी धर्मेंद्र के मस्त मौला मिजाज का ही हिस्सा था।
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सिप्पी ने आगे कहा कि धर्मेंद्र के भीतर एक मासूम, बच्चे जैसी सादगी थी। लेकिन कैमरा ऑन होते ही वे पल भर में एक गंभीर और मज़बूत ऐक्टर में बदल जाते थे। उनका यही गुण हर उस निर्देशक का दिल जीत लेता था जो उनके साथ काम करते थे। उन्हें ग़ुस्सा भी आता था, लेकिन उतनी ही जल्दी वे सामान्य भी हो जाते थे। (Ramesh Sippy interview Sholay)
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धर्मेंद्र ने 1975 में रिलीज़ हुई फिल्म 'शोले' में वीरू का किरदार निभाया था, जो भारतीय सिनेमा के इतिहास में अमर हो गया। यह फिल्म सिर्फ एक ब्लॉक बस्टर हिट ही नहीं थी बल्कि एक कल्ट क्लासिक का इतिहास बन गया।
हाल ही में धर्मेंद्र को मरणोपरांत पद्म विभूषण सम्मान से सम्मानित किया गया है। इस सम्मान पर हेमा मालिनी ने भावुक होते हुए कहा कि धर्म जी इसके पूरी तरह हकदार थे। उन्हें सिर्फ यही अफ़सोस है कि यह सम्मान उन्हें ज़िंदा रहते मिलना चाहिए था। लेकिन इससे इस पहचान और सम्मान की खुशी कम नहीं होती। (Hema Malini reminisces Sholay)
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हेमा मालिनी ने धर्मेंद्र की फिल्मों को याद करते हुए कहा कि उन्होंने धर्म जी के साथ ढेर सारी फ़िल्मों में उनकी नायिका का रोल निभाया, उनमें से उन्हें फिल्म 'शराफ़त' , 'नया ज़माना' , 'जुगनू' और 'शोले' बेहद पसंद हैं। हेमा मालिनी ने कहा कि धर्म जी गंभीर भूमिकाएं जितना बढ़िया निभा लेते उतना ही कॉमेडी रोल्स में भी जान डाल देते थे। उनकी हल्की-फुल्की कॉमेडी फिल्म 'चुपके चुपके' उन्हें खास तौर पर प्रिय है। अपना मूड ठीक करने के लिए वे अक्सर इस फिल्म को देखती हैं। हेमा जी ने भावुकता से कहा कि वे हर पल, हर सेकंड, उन्हें फिर से मिलने का इंतज़ार कर रही हैं।
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धर्मेंद्र से जुड़े ये किस्से सामने आते ही सोशल मीडिया पर भावनाओं की लहर दौड़ गई। नेटिज़न्स ने न सिर्फ़ उनकी फिटनेस और अनुशासन की तारीफ़ की, बल्कि उन्हें भारतीय सिनेमा का “असली हीरो” भी बताया।
एक यूज़र ने लिखा, “आज के समय में पचास किलोमीटर पैदल चलने की कल्पना भी मुश्किल है, और धर्मेंद्र ने वो भी शूटिंग से पहले कर दिखाया। यही है सच्चा समर्पण।”
एक अन्य ने कमेंट किया, “वे सिर्फ़ रुपहले पर्दे के वीरू नहीं थे, वे रियल ज़िंदगी में भी वही जज़्बा लेकर चलते थे।”
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पद्म विभूषण की ख़बर पर भी फ़ैन्स भावुक दिखे। एक नेटिज़न ने लिखा, “देर से मिला, लेकिन बिल्कुल सही इंसान को मिला सम्मान।” वहीं एक अन्य ने कहा, “धर्मेंद्र सिर्फ़ एक अभिनेता नहीं, एक दौर थे।”
FAQ
Q1: शोले के सेट से जुड़ी खास याद कौन साझा कर रहा है?
A1: दिग्गज फिल्मकार रमेश सिप्पी और अभिनेत्री हेमा मालिनी ने धर्मेंद्र के जज़्बे और मस्ती से जुड़ी यादें साझा की हैं।
Q2: धर्मेंद्र के किस किस्से ने सबको हैरान किया?
A2: धर्मेंद्र ने अचानक तय किया कि वह होटल से शूटिंग लोकेशन तक 50 किलोमीटर पैदल जाएंगे और सुबह शूटिंग पर पहुंचे, जो सबके लिए आश्चर्यजनक था।
Q3: यह घटना कब हुई थी?
A3: यह घटना शोले की शूटिंग के दौरान हुई थी, जब कास्ट और क्रू होटल में ठहरे हुए थे।
Q4: रमेश सिप्पी ने इस घटना के बारे में क्या कहा?
A4: रमेश सिप्पी ने बताया कि धर्मेंद्र की दृढ़ता और ऊर्जा देखकर सभी हैरान रह गए, लेकिन उनका जज़्बा अडिग था।
Q5: धर्मेंद्र का व्यवहार पर्दे के बाहर कैसा था?
A5: धर्मेंद्र पर्दे पर वीरू की तरह ही असल ज़िंदगी में भी ऊर्जा, जुनून और अनुशासन के प्रतीक थे।
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