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ताजा खबर: कलमकवाल (Kalamkaval) असल ज़िंदगी के कुख्यात सीरियल किलर मोहन कुमार, जिसे ‘सायनाइड मोहन’ के नाम से जाना जाता है, के केस से प्रेरित है. इस कहानी पर पहले ही दो हिंदी प्रोजेक्ट—दहाड़ और भगवत—देख चुके होने के कारण प्लॉट के स्तर पर बहुत ज्यादा नया कुछ महसूस नहीं होता.लेकिन इसके बावजूद,ममूटीकी सिहरन पैदा कर देने वाली परफॉर्मेंस और निर्देशक जितिन के. जोस की कसी हुई, gripping स्टोरीटेलिंग इस फिल्म को एक ऐसा थ्रिलर बना देती है, जो अंत तक आपकी पकड़ नहीं छोड़ती. ममूटी के फैंस के लिए यह फिल्म किसी सुखद सरप्राइज़ से कम नहीं है. दशकों के करियर में उन्होंने अभिनय के लगभग हर रंग को छुआ है, और यह परफॉर्मेंस उनके शानदार करियर में एक और चमकता हुआ सितारा जोड़ती है.
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क्या है कलमकवाल की कहानी (Kalamkaval story)
फिल्म की कहानी स्टैनली (ममूटी) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक महिला के साथ शारीरिक संबंध बनाने के बाद उसकी हत्या कर देता है. फिल्म शुरुआत में ही साफ कर देती है कि यह कोई एक घटना नहीं है—स्टैनली कई महिलाओं को अपना शिकार बना चुका है. उसके अपराधों को न तो सही ठहराने की कोशिश की जाती है और न ही उन्हें नरम दिखाया जाता है.
इसी बीच कहानी में एंट्री होती है जयकिशन (विनायकन) की, जो स्पेशल क्राइम ब्रांच का एक तेज़ और जिद्दी अफसर है और इस खौफनाक सीरियल किलर केस को सुलझाने की जिम्मेदारी संभालता है. कहानी में एक दिलचस्प मोड़ तब आता है, जब स्टैनली खुद जांच में जयकिशन की मदद करता नजर आता है. यह ट्विस्ट दर्शकों को धूम 3 में आमिर खान–अभिषेक बच्चन के समीकरण की याद दिला सकता है. जय इस बात से अनजान रहता है कि अपराधी उसके बिल्कुल पास ही मौजूद है और पूरी स्थिति को बेहद शांति और चालाकी से नियंत्रित कर रहा है. सस्पेंस इसी बात में है कि क्या जय समय रहते सच्चाई तक पहुंच पाएगा या नहीं.
फिल्म की खास बातें (Kalamkaval Malayalam movie)
जहां भगवत में कोर्टरूम ड्रामा पर ज्यादा फोकस था, वहीं कलमकवाल पूरी तरह जांच प्रक्रिया पर टिके रहती है. धूम 3 जैसा जाना-पहचाना ट्विस्ट यहां प्रभावी तरीके से इस्तेमाल किया गया है, जो इसे दहाड़ और भगवत से अलग बनाता है.
करीब ढाई घंटे की लंबाई के बावजूद फिल्म कहीं भी खिंची हुई नहीं लगती—जो आज के दौर में एक बड़ी उपलब्धि है. कहानी सीधी-सपाट है, बिना किसी ज़रूरत से ज्यादा थ्योरी या चौंकाने वाले खुलासों के. सब कुछ दर्शकों के सामने धीरे-धीरे खुलता है. क्लाइमैक्स भले ही थोड़ा प्रेडिक्टेबल हो, लेकिन उसका असर कम नहीं होता.
कलमकवाल की कास्ट (Kalamkaval cast)
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत ममूटी की परफॉर्मेंस है. वह ठंडे, निर्दयी और डरावने लगते हैं—आप उनसे नफरत करते हैं, उन्हें कोसते हैं, और यही एक अभिनेता के तौर पर उनकी सबसे बड़ी जीत है.विनायकन भी शानदार हैं, खासकर क्लाइमैक्स में जहां उनके एक्सप्रेशंस बहुत कुछ कह जाते हैं. गिबिन गोपीनाथ अच्छा प्रभाव छोड़ते हैं.महिला कलाकारों—गायत्री अरुण, राजीशा विजयन, श्रुति रामचंद्रन, मालविका मेनन—सभी ने अपने-अपने किरदारों को ईमानदारी से निभाया है. सपोर्टिंग कास्ट में अज़ीज़ नेदुमंगड और कुंचन भी प्रभावी हैं.
टेक्निकल पक्ष और निर्देशन (Kalamkaval true story)
सिनेमैटोग्राफर फैसल अली ने फिल्म को एक खास विज़ुअल टोन दिया है. आंखों के कॉन्टैक्ट, मुलाकातों और बातचीत पर आधारित स्लो-मोशन शॉट्स सस्पेंस को और गहरा बनाते हैं.प्रवीण प्रभाकर की एडिटिंग फिल्म को टाइट बनाए रखती है, जबकि बैकग्राउंड स्कोर अहम दृश्यों को और प्रभावशाली बनाता है. लोकेशंस और प्रोडक्शन डिज़ाइन कहानी में रियलिज़्म जोड़ते हैं.निर्देशक जितिन के. जोस की तारीफ करनी होगी—भले ही कहानी नई न हो, लेकिन उसे जिस आत्मविश्वास और नियंत्रण के साथ पेश किया गया है, वही फिल्म को खास बनाता है.
रिव्यू (Kalamkaval movie review)
कलमकवाल मलयालम दर्शकों के लिए एक ताज़ा और सिहरन भरा सिनेमैटिक अनुभव है. हिंदी दर्शकों के लिए भी, जो इस तरह की कहानियों से परिचित हैं, यह एक अच्छी वन-टाइम वॉच साबित होती है.आखिरकार, ममूटी की दमदार परफॉर्मेंस ही फिल्म को एक साधारण थ्रिलर से ऊपर उठाती है और जॉनर के शौकीनों के लिए इसे देखने लायक बनाती है.
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