टॉयलेट एक प्रेम कथा
125.40 cr
रेटिंग** इम्तियाज अली, शाहरूख खान और अनुष्का शर्मा अभिनय और मेकिंग के इन तीन महारथियों को देखते हुये फिल्म ‘जब हैरी मेट सेजल’ से उम्मीद रखना बिलुकल जायज था । लेकिन शाहरूख,अनुष्का जैसे बड़े अदाकारों की मेहनत को जाया करती ये फिल्म पूरी तरह से निराश करती है
हालांकि डाकूमेंट्रीज या शॉर्ट फिल्में पहले से बनती आ रही हैं लेकिन इन दिनों वेब सीरीज तथा शॉर्ट फिल्मों का चलन पहले कहीं ज्यादा बढ़ रहा है। हाल ही में राजा राम मुखर्जी द्धारा निर्देशित शॉर्ट फिल्म ‘सब ठीक है देखने का अवसर मिला। इस फिल्म से एक वक्त की नाय
रेटिंग** एक वक्त था जब शादी विवाहों का लोग बाग बेसब्री से इंतजार किया करते थे क्योंकि उन दिनों शादी उनके लिये एक पर्व की तरह होती थी लेकिन अब सब बदल गया है। अब एरेंज नहीं बल्कि लव मैरीज का चलन है। यहां लव मैरीज के खिलाफ एक वेडिंग एरेंजर की लव स्टोरी को द
रेटिंग*** हासिल, चरस, साहब बीवी और गैंगस्टर तथा पान सिंह जैसी उत्कृष्ठ फिल्मों के रचियता लेखक निर्देशक तिग्मांशु धूलिया ने इस बार पटरी से थोड़ा उतरते हुये पीरियड फिल्म ‘रागदेश’ का निर्देशन किया। राज्य सभा टीवी द्धारा निर्मित ये फिल्म 1945 के फेमस रेड फो
रेटिंग**** रियलिस्टिक फिल्मों के लिये जाने जाते फिल्मकार मधुर भंडारकर ने अपनी फिल्म ‘इंदू सरकार’ में 1975 के आपातकालीन जैसे काले अध्याय को जिस प्रकार साहसिक तरीके से दिखाया है, वो उनकी इस प्रकार की फिल्मों में इस्तेमाल निर्देशकीय प्रतिभा को दर्शाता है।
रेटिंग**** एक ऐसा पारिवारिक ड्रामा जिसमें कॉमेडी और इमोशन का जबरदस्त तड़का हो उसे लेखक निर्देशक अनीस बज़्मी ही रच सकते हैं। दूसरे जबकि इन दिनों इस तरह की फिल्मों का दौर लगभग खत्म सा हो चका है ऐसे में अनीस बज़्मी पारिवारकि फिल्म ‘मुबारकां’ में ऐसा कुछ रचत