/mayapuri/media/media_files/2026/03/07/lakshmipriya-devi-gugun-kipgen-and-producer-shujaat-saudagar-on-the-success-of-boong-said-2026-03-07-16-15-15.jpeg)
सिनेमाई दुनिया में ब्रिटिश एकेडमी ऑफ फिल्म्स एंड टेलीविजन आर्ट्स (British Academy of Film and Television Arts – BAFTA) अवॉर्ड्स की एक खास पहचान है. इसी प्रतिष्ठित मंच पर मणिपुरी फिल्म ‘बूंग’ (Boong) ने बेस्ट चिल्ड्रन्स एंड फैमिली फिल्म (Best Children’s & Family Film) का अवॉर्ड जीतकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है. यह सम्मान पाने वाली पहली भारतीय फिल्म बनकर ‘बूंग’ ने इतिहास रच दिया है, जिसे भारतीय सिनेमा खासकर उत्तर-पूर्वी फिल्म इंडस्ट्री के लिए गर्व का पल माना जा रहा है.
फिल्म की निर्देशक लक्ष्मीप्रिया देवी इससे पहले ‘पीके’ (PK), ‘तलाश’ (Talaash) और ‘लक्ष्य’ (Lakshya) जैसी चर्चित फिल्मों में सेकंड यूनिट डायरेक्टर के रूप में भी काम कर चुकी हैं. अब ‘बूंग’ के जरिए उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी अलग पहचान बनाई है. यह फिल्म फरहान अख्तर (Farhan Akhtar) और रितेश सिधवानी (Ritesh Sidhwani) के प्रोडक्शन हाउस की प्रस्तुति है.
हाल ही में फिल्म की थिएटर रिलीज से पहले आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में लक्ष्मीप्रिया देवी (Lakshmipriya Devi), युवा कलाकार गुगुन किप्जेन (Gugun Kipgen) और निर्माता शुजात सौदागर (Shujaat Saudagar) मौजूद रहे. इस दौरान सभी ने फिल्म के बारे में खुलकर बात की. आइये जानते हैं प्रेस इवेंट में किसने क्या कहा...
फिल्म की तैयारी और ट्रेनिंग
प्रेस कार्यक्रम में निर्देशक लक्ष्मी ने बताया कि फिल्म की शूटिंग से पहले कलाकारों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया. गुगुन और कुछ अन्य कलाकारों को मणिपुर की पारंपरिक मार्शल आर्ट थांग टा (Thang-Ta) सीखनी पड़ी. लक्ष्मी ने बताया कि शुरुआत में यह ट्रेनिंग गुगुन को बहुत मुश्किल लगी और वह इसे छोड़ना चाहते थे. लेकिन बाद में उन्होंने समझाया कि फिल्म में हर कलाकार का अच्छा होना जरूरी है, तभी पूरी फिल्म बेहतर बनती है.
ऐसे हुई कास्टिंग
फिल्म में ‘बूंग’ का किरदार निभाने वाले गुगुन किप्जेन से शांतिप्रिया देवी से 2021 में मिली थी. डायरेक्टर ने उसी वक्त तय कर लिया था कि गुगुन बूंग के लिए परफेक्ट कास्टिंग है. वह बताती हैं, 'पहली मुलाकात में उसने कहा था, ‘मुझे भाषा नहीं आती, लेकिन मैं ऑडिशन देने के लिए तैयार हूं.’ गुगुन अपनी डायरेक्टर की बात को आगे बढ़ाते हुए आगे कहते हैं, 'बहुत लंबी-चौड़ी स्क्रिप्ट थी और मेरे सामने भाषा की भी चुनौती थी. शुरुआत में बहुत मजा आया, लेकिन शूटिंग के दौरान एक समय ऐसा भी आया जब लगा कि सब छोड़कर भाग जाऊं. मगर आज मैं बहुत खुश हूं.'
महिला डायरेक्टर होने की चुनौती
जब उनसे पूछा गया कि एक महिला डायरेक्टर होने के नाते उन्हें किन चुनौतियों से गुजरना पड़ा, तो वह कहती हैं ,'मुझे कई तरह के खांचों में बांटा गया है, कभी नॉर्थ-ईस्ट की फिल्ममेकर, तो कभी महिला डायरेक्टर. लेकिन मैंने खुद को कभी इस तरह नहीं देखा. खासकर मणिपुर से आने के कारण वहां महिलाएं बहुत मजबूत होती हैं, इसलिए वहां के पुरुषों के लिए कभी-कभी बुरा भी लगता है. असली चुनौती परिस्थितियों या शूटिंग से नहीं, बल्कि खुद से थी. मैं पहले बहुत बड़ी फिल्मों के सेट पर काम कर चुकी हूं, इसलिए यह फिल्म उनके मुकाबले बहुत छोटी लगती है.'
किसी फिल्ममेकर के लिए राजनीतिक आवाज होना कितना मायने रखता है, इसके जवाब में उन्होंने कहा, “मैं पॉलिटिकल वॉइस के बारे में नहीं जानती, लेकिन इतना जरूर कह सकती हूं कि किसी भी फिल्ममेकर की अपनी आवाज होना जरूरी है.“
स्पीच हटाए जाने पर बोली लक्ष्मीप्रिया
बाफ्टा के चैनल से उनकी स्पीच हटाए जाने के बाद दुबारा अपलोड करने पर उन्होंने कहा, “ऐसा सिर्फ मेरी स्पीच के साथ नहीं हुआ. दूसरों के साथ भी हुआ ह. 'आई स्वेयर' के मेकर के साथ भी ऐसा हुआ था. पहले स्पीच हटाई गई और फिर अपलोड कर दी गई. मुझे उस बात का ज्यादा अफसोस नहीं हुआ. मुझे कई लोगों के मैसेज आए, मगर मेरे लिए बाफ्टा का अनुभव अविश्वसनीय था. मैं उस खूबसूरत पल को खराब नहीं करना चाहती थी. मैंने उस पल का पूरा आनंद लिया.'
/filters:format(webp)/mayapuri/media/media_files/2026/03/07/trailer-2026-03-07-16-10-57.jpg)
भेदभाव करना है गलत
इस प्रेस कांफ्रेंस में लक्ष्मीप्रिया देवी ने बताया कि रीमा दास की फिल्मों ने कई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में हिस्सा लिया और अवार्ड भी जीते हैं. साथ ही, उन्होंने 1981 की मणिपुरी फिल्म 'इमागी निंगथेम' और 1990 की 'इशानौ' का उल्लेख किया, जो विश्व प्रसिद्ध कान्स फिल्म फेस्टिवल सहित कई बड़े मंचों पर दिखाई जा चुकी हैं. ये फिल्में लक्ष्मीप्रिया की मौसी एम के बिनोदिनी देवी के द्वारा लिखी गई थीं.
उन्होंने आगे बताया, "नॉर्थ-ईस्ट भारत से कई फिल्में इंटरनेशनल लेवल पर सामने आई हैं, लेकिन नॉर्थ-ईस्ट में हर कोई खुद को नॉर्थईस्टर्न कहलाना पसंद नहीं करता, वो भी हम जैसे ही भारतीय है, नॉर्थ-ईस्ट शब्द और भेदभाव करना गलत है." दरअसल, फिल्म 'बूंग' मणिपुर की पृष्ठभूमि पर बेस्ड है, लेकिन लक्ष्मीप्रिया ने इसे मणिपुरी पहचान को बढ़ावा देने के लिए नहीं बनाया. ये कहानी उनके बचपन के अनुभवों और पारिवारिक कहानियों से प्रेरित है.
एक्सेल एंटरटेनमेंट का किया धन्यवाद
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान निर्देशक ने भावुक होते हुए कहा, "अगर एक्सेल साथ नहीं होता, तो 'बूंग' कभी रिलीज ही नहीं हो पाती." निर्देशक ने रितेश सिधवानी और फरहान अख्तर द्वारा स्थापित बैनर एक्सेल एंटरटेनमेंट से मिले अटूट समर्थन को फिल्म की सफलता का एक बड़ा आधार बताया.
/filters:format(webp)/mayapuri/media/media_files/2026/03/07/gf-2026-03-07-16-11-46.jpeg)
क्या 'बूंग' का दूसरा पार्ट बनेगा?
क्या वह 'बूंग' का पार्ट टू बनाने की योजना बना रही हैं? इस पर लक्ष्मीप्रिया मुस्कराते हुए कहती हैं, 'फिलहाल ऐसी कोई योजना नहीं है. लेकिन यूरोप के एक चिल्ड्रंस फिल्म फेस्टिवल में कई बच्चों ने स्क्रीनिंग के बाद 'बूंग पार्ट 2' बनाने की मांग की थी.' भविष्य की फिल्मों के बारे में पूछने पर लक्ष्मी ने कहा कि अभी वह किसी नई फिल्म की योजना नहीं बना रही हैं. उनका कहना है कि अगर उन्हें कोई ऐसी कहानी मिलती है जो दिल को छू जाए, तभी वह नई फिल्म बनाना चाहेंगी. अगर ऐसी कहानी नहीं मिली तो वह फिल्मों के प्रोडक्शन या शेड्यूलिंग जैसे काम करने में भी खुश रहेंगी.
गुगुन का अनुभव
फिल्म के युवा कलाकार गुगुन ने भी इस कार्यक्रम में अपने अनुभव साझा किए. उन्होंने बताया कि इस फिल्म पर काम करना उनके लिए एक साथ कठिन और रोमांचक दोनों था. गुगुन ने कहा कि अभिनय करना उनके लिए ज्यादा मुश्किल नहीं था, लेकिन फिल्म के संवाद मणिपुरी भाषा (Maithilon) में होने की वजह से उन्हें नई भाषा सीखनी पड़ी. उन्होंने यह भी बताया कि फिल्म की स्क्रिप्ट लगभग 50–60 पन्नों की थी और उसे याद करना उनके लिए चुनौतीपूर्ण था.
/filters:format(webp)/mayapuri/media/media_files/2026/03/07/jlao2fg8_boong_625x300_05_march_26-2026-03-07-16-12-37.webp)
अवॉर्ड मिलने पर ऐसा था गुगुन का रिएक्शन
जब उनसे पूछा गया कि बाफ्टा में बेस्ट चिल्ड्रंस फिल्म का अवॉर्ड मिलने पर कैसा लगा, तो वे मुस्कुराते हुए बोले, 'मैं थोड़ा अपसेट था कि मुझे वहां बुलाया नहीं गया. लेकिन मुझे बहुत गर्व था कि इतनी ख्याति प्राप्त अंतरराष्ट्रीय फिल्मों के बीच बूंग भी शामिल थी.'
निर्माता शुजात ने बताया
निर्माता शुजात सौदागर ने बताया कि इस फिल्म की सबसे बड़ी खासियत इसकी कहानी और उसका नजरिया है. उनके मुताबिक यह एक ऐसी कहानी है जिसे बच्चे की नजर से दिखाया गया है, लेकिन यह फिल्म असल में बड़ों के लिए है. उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे इंसान बड़ा होता है, समाज और माहौल उसे कई तरह से बदल देते हैं और वह अपने बचपन की निडरता खो देता है. फिल्म का मुख्य किरदार ‘बूंग’ इसी निडरता और उम्मीद का प्रतीक है. उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें हमेशा लगता है कि भुवन में लक्ष्मी की झलक है और लक्ष्मी में भुवन की.
प्रेरणा देगी ‘बूंग’
फिल्म की टीम ने कहा कि ‘बूंग’ जैसी फिल्में दिखाती हैं कि भारत में अलग-अलग तरह की कहानियां और नए फिल्ममेकर सामने आ रहे हैं. BAFTA जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर मिली पहचान न सिर्फ इस फिल्म के लिए, बल्कि पूरे भारतीय सिनेमा के लिए गर्व की बात है. यह सफलता आने वाले समय में नए फिल्ममेकरों को भी आगे बढ़ने की प्रेरणा देगी.
क्या है ‘बूंग’ की कहानी?
‘बूंग' एक मणिपुरी कहानी है, जो एक छोटे लड़के (गुगुन किपगेन द्वारा निभाया गया किरदार) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपने टूटे हुए परिवार को फिर से जोड़ने का सपना देखता है. बूंग की परवरिश उसकी सिंगल मदर मंदाकिनी (बाला हिजाम निंगथौजम) ने की है. वह अपने लापता पिता की तलाश में अपने सबसे अच्छे दोस्त के साथ एक भावुक सफर पर निकलता है. यह फिल्म उम्मीद, अटूट साहस और माँ-बेटे के खास रिश्ते जैसे बेहद जरूरी पहलुओं को छूती है.
अंतरराष्ट्रीय प्लेटफार्म पर कमा चुकी है नाम
फिल्म का पहला प्रीमियर 2024 के Toronto International Film Festival के डिस्कवरी सेक्शन में हुआ था. इसके बाद इसे Warsaw International Film Festival 2024, MAMI Mumbai Film Festival 2024, International Film Festival of India और Indian Film Festival of Melbourne 2025 में भी प्रदर्शित किया गया.
एक्सेल एंटरटेनमेंट, चॉकबोर्ड एंटरटेनमेंट और सूटेबल पिक्चर्स के सहयोग से बनी ‘बूंग’ सिनेमाघरों में दस्तक दे चुकी है.
READ MORE:
मुंबई कॉन्सर्ट पर बवाल के बाद करण औजला का यू-टर्न, फिर करेंगे बड़ा शो
डांस, टीवी और बॉलीवुड में चमके शांतनु माहेश्वरी, जानिए उनकी जिंदगी और करियर
‘द 50’ की शूटिंग के दौरान घायल हुए रजत दलाल, सर्जरी के बाद फैंस को दी हेल्थ अपडेट
‘Oh My God 3’ से रानी मुखर्जी बाहर? अक्षय कुमार की फिल्म को लेकर सामने आया नया अपडेट
Tags : Boong BAFTA win | Boong Manipuri film | Boong PVR INOX release | Emotional story Boong | Lakshmipriya Devi Boong
Follow Us
/mayapuri/media/media_files/2026/03/06/cover-2683-2026-03-06-18-18-14.png)