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ताजा खबर : फिल्मों के जरिए देशभक्ति का जज्बा जगाने में बॉलीवुड कभी पीछे नही रहा. इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि देश की आजादी की जंग में बॉलीवुड ने अपनी फिल्मों के माध्यम से अहम भूमिका निभाई और आजादी के बाद भी हर बदलते दौर में सिनेमा की भूमिका और अहमियत कम नहीं हुईं.मगर फिल्मों में देशप्रेम को कई मुखौटों में पेश किया जाता रहा है.फिल्मों में किस तरह देशभक्त के लिए अलग-अलग अंदाज में फ़िल्में बनाई जा रही है, इसे कुछ बेहतरीन फिल्मों के उदाहरण से इसे समझा जा सकता है.
भारतीय सिनेमा में देशभक्त के यह अलग-अलग प्रकार की फिल्में
झांसी की रानी (1953)
हमारे देश के इतिहास को यदि उठाकर देखा जाए तो रानी लक्ष्मीबाई के अलावा भी कई वीरांगनाएं हैं, जो अपनी वीरता व देशप्रेम के चलते अमर हो गईं. दुर्भाग्य यह है कि दुनिया की कुछ सबसे बड़ी फिल्म इंडस्ट्रियों में शामिल बॉलीवुड ने कभी इनकी कहानी लोगों तक लाने की जहमत नहीं उठाई, शायद इसमें फायदा थोड़ा कम था.
शहीद (1965)
मनोज कुमार अभिनीत यह फिल्म शहीद-ए-आजम भगतसिंह की जीवनी पर आधारित है. साल 1965 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के साये में आई इस फिल्म को सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म के नेशनल अवॉर्ड से भी नवाजा गया था. यह भगतसिंह पर बनने वाली पहली फीचर फिल्म थी. इसके बाद अब तक षहीद भगतसिंह पर सात फिल्में बनीं जिसमें अजय देवगन की साल 2002 में आई ‘द लीजेंड ऑफ भगतसिंह’ उल्लेखनीय है.तो वहीं 23 मार्च 1931 भी है.
गांधी (1982)
यह भारत का दुर्भाग्य ही है कि देश के राष्ट्रपिता कहे जाने वाले बापू के जीवन पर बनी अब तक की सर्वश्रेष्ठ फिल्म विदेशियों ने बनाई. इसे गांधीजी की महानता का परिणाम भी कह सकते हैं कि विदेशी उनके व्यक्तित्व के ऐसे मुरीद हुए कि फिल्म ही बना दी. हालांकि इस फिल्म के निर्माण में भारतीय सरकार व कलाकारों का भी सहयोग रहा था, लेकिन फिल्म के लेखन व निर्देशन से लेकर मुख्य किरदार निभाने तक का जिम्मा विदेशियों ने निभाया. आपको जानकर शायद थोड़ी हैरानी हो, पर यह फिल्म कुल 11 श्रेणियों में ऑस्कर पाने के लिए नामांकित हुई थी जिसमें श्रेष्ठ फिल्म, निर्देशन व अभिनय समेत 8 श्रेणियों में यह ऑस्कर जीतने में कामयाब भी रही. ऑस्कर के अलावा भी फिल्म ने लगभग सभी राष्ट्रीय व अंतराष्ट्रीय अवॉर्ड समारोह में अधिकतर खिताब अपने नाम किए हैं.
सरदार (1993)
यह फिल्म आजादी के बाद अखंड भारत का निर्माण करने वाले सरदार वल्लभ भाई पटेल के जीवन पर आधारित है. इसमें आपको परेश रावल का शानदार अभिनय भी देखने को मिलेगा. फिल्म को आलोचकों के द्वारा काफी सराहा गया था. फिल्म में सरदारजी के द्वारा देश की आजादी से लेकर गांधीजी की मौत के बाद नेहरू के साथ उनके मतभेद तक को काफी अच्छे से दर्शाया गया है.
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस: द फॉरगॉटन हीरो (2004)
भारत की आजादी की सूत्रधार रहीं महान हस्तियों में से शायद सबसे कम चर्चा नेताजी सुभाषचन्द्र बोस के बारे में ही की जाती है. आजाद हिन्द फौज के जरिए अंग्रेजों के पसीने छुड़ा देने वाले नेताजी के ऊपर साल 2004 में यह फिल्म श्याम बेनेगल के निर्देशन में बनी है. यह फिल्म चर्चा में अधिक नहीं रही, लेकिन इसने काफी सराहना जरूर बटोरी. कई अन्य दमदार फिल्मों की तरह यह भी बॉक्स ऑफिस में फ्लॉप ही रही, लेकिन 2 श्रेणियों में मिले नेशनल अवॉर्ड से इसकी पूर्ति हो जाती है.
मंगल पांडेयः द राइजिंग
2005 आजादी की लड़ाई के अग्रदूत कहे जाने वाले मंगल पांडेय के जीवन का दर्शन कराने वाली यह फिल्म देशभक्ति पर बनी एक बेहतरीन फिल्म है. जिसमें मंगल पांडेय के जीवन को दिखाया गया है कि कैसे उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह का बिगुल बजा दिया था और अंत में उन्हें फांसी की सजा दे दी गई थी. इस फिल्म में भी आमिर खान ही मुख्य किरदार में थे.
लीजेंड ऑफ भगत सिंह (2002)
2002 में बनी फिल्म लीजेंड ऑफ भगत सिंह शहीद भगत सिंह के जीवन पर आधारित फिल्म थी. फिल्म में भगत सिंह का किरदार अजय देवगन ने निभाया था.इस फिल्म को बेस्ट फिल्म कैटेगरी में राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला था इसके अलावा फिल्म को 3 फिल्म फेयर अवॉर्ड भी मिले थे.
फ्रीडम फाइटर
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