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हनी ईरानी (Honey Irani) आज अपना 71वां जन्मदिन मना रही हैं. 17 जनवरी 1955 को जन्मीं हनी ईरानी न सिर्फ हिंदी सिनेमा का एक अहम नाम रही हैं, बल्कि उन्होंने अपनी ज़िंदगी के हर पड़ाव पर साहस, मेहनत और प्रतिभा की मिसाल पेश की है. आज भले ही उन्हें फरहान अख्तर और जोया अख्तर की मां के रूप में जाना जाता हो, लेकिन उनका अपना व्यक्तित्व और करियर अपने आप में बेहद समृद्ध और प्रेरणादायक रहा है.
हनी ईरानी ने बहुत छोटी उम्र में ही फिल्मी दुनिया में कदम रख दिया था. महज़ ढाई से चार-पांच साल की उम्र में उन्होंने बतौर बाल कलाकार हिंदी सिनेमा में डेब्यू किया और 1960 के दशक में वह उस दौर की सबसे चर्चित चाइल्ड आर्टिस्ट में शामिल हो गईं. प्यार की प्यास, चिराग कहां रोशनी कहां और बॉम्बे का चोर जैसी फिल्मों में उनकी मासूमियत और सहज अभिनय ने दर्शकों का दिल जीत लिया था. एक समय ऐसा भी था जब वह लगभग हर दूसरी फिल्म में नजर आती थीं और बड़े सितारों के बराबर लोकप्रियता हासिल कर चुकी थीं.
हनी ईरानी को बच्चे जैसा मानती थीं मीना कुमारी
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बचपन में ही हनी ईरानी का मन मीना कुमारी (Meena Kumari) से जुड़ गया था, क्योंकि वे असल में उनमें मां की छवि देखने लगी थीं. 1959 में आई फिल्म 'चिराग कहां रोशनी कहां' में हनी ने मीना कुमारी के साथ काम किया था. फिल्म में घुंघराले बालों की वजह से उन्होंने नन्हें राजू की भूमिका अदा की थी. इस फिल्म के दौरान मीना कुमारी ने हनी और उनकी बहन डेजी को इतना प्यार दिया कि उन्हें सेट पर कभी मां की कमी महसूस नहीं हुई.
मीना कुमारी सेट पर दोनों का ऐसे ध्यान रखती थी जैसे दोनों उन्हीं के बच्चे हों. सेट पर दोनों के बीच का प्रेम देखकर बाकी लोग भी हैरान हो जाते थे. मीना कुमारी और हनी ईरानी की जोड़ी फिल्म 'चिराग कहां रोशनी कहां' में हिट रही, और फिर जोड़ी बाद में 1960 में आई 'संतान', 'एक ही रास्ता', और 'गोमती के किनारे' जैसी फिल्मों में साथ दिखी. मीना कुमारी और हनी का रिश्ता सिर्फ सेट तक सीमित नहीं था. सेट के बाहर असल जिंदगी में भी मीना दोनों को अपने बच्चों के जैसे ही मानती थी. खुद हनी ने इंटरव्यू में कहा था कि मीना कुमारी सेट पर उन्हें अपने बच्चों की तरह चाहती थी. हनी ने मीना कुमारी को ‘सनशाइन वुमेन’ का टाइटल भी दिया था, जिन्होंने उनकी जिंदगी को रोशनी से जगमगा दिया था.
हनी ईरानी और जावेद अख्तर की लवस्टोरी
हनी ईरानी और जावेद अख्तर (Javed Akhtar) की मुलाकात साल 1972 में फिल्म ‘सीता और गीता’ के सेट पर हुई थी. उस समय जावेद लेखक के तौर पर अपनी पहचान बना रहे थे और हनी ईरानी एक सहायक अभिनेत्री थीं. कहा जाता है कि दोनों के बीच प्यार की शुरुआत ताश के खेल के दौरान हुई थी. हनी ईरानी के मुताबिक, “जावेद हर किसी के साथ सेट पर रमी खेलते थे. एक बार ऐसे ही खेल के दौरान वह 100-200 रुपये हार बैठे. उस समय पर इतने पैसे बहुत होते थे. उन्होंने मुझसे कहा कि तुम मेरे लिए एक कार्ड निकालो. मैंने साहब के लिए एक रन और रमी कार्ड निकला और वे जीत गए. उन्होंने मुझसे कहा, ‘तुमने मेरे लिए इतना अच्छा कार्ड खींचा है, मुझे लगता है कि हम एक-दूसरे के लिए ही बने हैं और उन्होंने मुझे शादी के लिए प्रपोज कर दिया.”
भले ही वह सिर्फ 17 साल की थीं, लेकिन उन्हें अगली बड़ी चीज के रूप में लॉन्च करने के लिए निर्माता हनी ईरानी के घर के बाहर खड़े रहते थे. लेकिन, हनी जावेद के प्यार में पागल थी और उनसे शादी करना चाहती थी.
सलीम खान जावेद का रिश्ता लेकर गए थे
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इस बीच, जावेद अख्तर ने अभी तक अपने करियर की शुरुआत नहीं की थी. यह सलीम खान (Salim Khan) ही थे जो हनी ईरानी की मां के पास शादी का प्रस्ताव लेकर गए थे. "यह लड़का आपकी लड़की से शादी करना चाहता है लेकिन उसके पास घर नहीं है, वह ताश खेलता है और शराब पीता है," उन्होंने हनी की माँ से कहा. थोड़ा विरोध करने के बाद हनी की मां मान गईं.
1972 में हुई थी शादी
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हनी ईरानी उस समय जावेद से काफी छोटी थीं. शुरुआत में विरोध का सामना करना पड़ा. हालांकि जावेद के आत्मविश्वास और टैलेंट को देखते हुए परिवार आखिरकार मान गया. साल 1972 में दोनों ने निकाह कर लिया. शादी के शुरुआती साल बेहद सादगी भरे थे. उनके पास रहने के लिए अपना घर तक नहीं था, लेकिन आपसी प्रेम ने सब कुछ संभाल लिया. इस शादी से उनके दो बच्चे अभिनेता फरहान अख्तर और जोया अख्तर (Farhan Akhtar and Zoya Akhtar) हुए, जो आज सफल फिल्ममेकर है.
जावेद की शबाना संग दूसरी शादी
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70 के दशक के अंत तक जावेद अख्तर की कामयाबी आसमान छू रही थी. इसी दौरान उनके जीवन में शबाना आजमी (Shabana Azmi) की एंट्री हुई. जावेद और शबाना के बीच बढ़ती नजदीकियों की खबर जब हनी ईरानी को मिली तो घर में तनाव बढ़ने लगा. काफी कोशिशों के बाद भी जब किसी भी तरह बात नहीं बनी तो 1984 में जावेद और हनी अलग हो गए. हनी ईरानी ने कभी भी मीडिया में जावेद या शबाना के खिलाफ जहर नहीं उगला. उन्होंने गरिमा बनाए रखी और चुपचाप जावेद के जीवन से बाहर निकल गईं. दिग्गज गीतकार जावेद अख्तर वर्तमान में शबाना आजमी से विवाहित हैं. जावेद और शबाना ने 9 दिसंबर, साल 1984 को शादी की थी.
कहावत है—“पूत के पांव पालने में नजर आते हैं”, और यह कहावत हनी ईरानी की ज़िंदगी पर पूरी तरह फिट बैठती है. बचपन से ही कला और सिनेमा से जुड़ी रहीं हनी ईरानी ने आगे चलकर न सिर्फ अपने लिए एक पहचान बनाई, बल्कि अपने बच्चों के भीतर भी रचनात्मकता और सोच की मजबूत नींव रखी. यही वजह है कि आज फरहान अख्तर और जोया अख्तर हिंदी सिनेमा के सबसे संवेदनशील और सफल फिल्ममेकर्स में गिने जाते हैं.
बनाई सफल लेखिका के रूप में पहचान
भले ही हनी ईरानी ने एक्टिंग छोड़ दी और खुद को लाइमलाइट से दूर कर लिया, लेकिन उन्होंने लेखन के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई. ‘‘लम्हे’ (Lamhe), ‘आइना’ (Aaina), ‘डर’ (Darr) और ‘कहो ना प्यार है’ (Kaho Naa… Pyaar Hai) जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों की स्क्रिप्ट हनी ईरानी ने ही लिखी थी. आज भी वे बॉलीवुड की सबसे सम्मानित पटकथा लेखिकाओं में गिनी जाती हैं, भले ही वे कैमरों के सामने आना पसंद नहीं करतीं.
Honey Irani Movies
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